स्वयं प्रकाश

स्वयं प्रकाश (जन्म: 20 जनवरी 1947, इंदौर; निधन: 8 दिसंबर 2019, भोपाल) हिंदी साहित्य के एक प्रमुख कहानीकार, उपन्यासकार और नाटककार थे।

  • उन्होंने भारतीय नौसेना, डाक-तार विभाग और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में राजभाषा अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए लेखन जारी रखा, और साठोत्तरी पीढ़ी के बाद के 'जनवादी' (लोकतांत्रिक) साहित्यिक आंदोलन से जुड़े रहे।
  • उनकी कहानियों और उपन्यासों में मध्यमवर्गीय समाज की विसंगतियों, साम्यवादी आंदोलन की स्थितियों और श्रमिक जीवन को सजीव रूप में चित्रित किया गया है।
  • उनके प्रमुख उपन्यासों में 'जलते जहाज पर' (अपने नौसेनिक जीवन पर), 'बीच में विनय' (राजस्थान के भीनमाल में कम्युनिस्ट आंदोलन पर) और 'ईंधन' (भूमंडलीकरण का भारतीय समाज पर प्रभाव) शामिल हैं।
  • उन्होंने 'क्यों' नामक लघु पत्रिका का संपादन किया, 'फीनिक्स' जैसे नाटक लिखे, और बाल साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किए।
  • कर्कट रोग (कैंसर) के कारण 2019 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी रचनाएं भारतीय सामाजिक परिवर्तन और मानवीय संघर्षों की महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बनी हुई हैं।