बाँध
बांध जल को रोककर बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन में मदद करते हैं, और जल की अत्यधिक कमी (कुल क्षेत्रफल का 10.41% होते हुए केवल 1.16% जल उपलब्धता) से जूझते राजस्थान के लिए ये जीवनरेखा हैं। जवाई बांध (1946, महाराजा उम्मेद सिंह) 'मारवाड़ का अमृत सरोवर' कहलाता है, जो 81 मीटर ऊँचा और पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा जल भंडार है। चंबल नदी पर बने राणा प्रताप सागर (1970) को ₹31 करोड़ में बनने वाला विश्व का सबसे सस्ता बांध माना जाता है, जिस पर परमाणु बिजलीघर स्थापित है, जबकि गांधी सागर (1960) और जवाहर सागर (1973) विद्युत व सिंचाई के प्रमुख स्रोत हैं। बरेठा बांध (1897, भरतपुर) अपनी जहाज जैसी आकृति के लिए प्रसिद्ध है, और टोरड़ी सागर बांध (टोंक) की खासियत है कि उसके सारे गेट खोलने पर भी एक बूंद पानी नहीं रुकता। जाखम बांध (प्रतापगढ़) जनजाति उपयोजना के अंतर्गत बनाया गया, जबकि जैसलमेर की खड़ीन और भूगर्भीय 'सीर' जैसी पारंपरिक जल संचयन विधियाँ आज भी उपयोगी हैं। नागौर में फ्लोराइड के कारण होने वाले कुबड़पन की समस्या से निपटने के लिए अब्दुल कलाम ने बाड़मेर के तुरबी गांव में 'सुजलाम' परियोजना का शुभारंभ किया था, और राज्य की जल नीति 1999 में घोषित की गई।
Source: बाँध — Wikipedia · Summary by RollWiki AI · Language: Hindi